शब्द्श: पढ़ते रहे किताब ....
हाँ खुली किताब ही तो थी
हाँ खुली किताब ही तो थी
कोई वादा न था किसी नए किस्से का
खुलेगा कोई नया रहस्य ऐसा भी न था
हा, हर सवाल पर एक जवाब का वादा था
खुलेगा कोई नया रहस्य ऐसा भी न था
हा, हर सवाल पर एक जवाब का वादा था
कुछ सवाल पूछे न जा सकते थे
कुछ जवाब दिये ना जा सकते थे
और जहाँ उलझन थी ...
सवाल को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाना था
ये भी कोई सवाल है भला ...? नेक्स्ट.......
कुछ जवाब दिये ना जा सकते थे
और जहाँ उलझन थी ...
सवाल को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाना था
ये भी कोई सवाल है भला ...? नेक्स्ट.......
फिर भी एक औज़ार था जिये जाने का निरंतर
कहीं चौंका देने वाली जीवंतता लिए ......
और कहीं खुशियों का पुलिंदा लिए
और कहीं उत्सुकता के भँवर लिए
डूबने को आतुर ....
कहीं चौंका देने वाली जीवंतता लिए ......
और कहीं खुशियों का पुलिंदा लिए
और कहीं उत्सुकता के भँवर लिए
डूबने को आतुर ....
और वही बना विधायक
उसी ने किए निर्णय
कभी ढूँढा जाता रहा सलीका
और कभी तलब......!!
उसी ने किए निर्णय
कभी ढूँढा जाता रहा सलीका
और कभी तलब......!!
संध्या
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