गुलाब के फूलों का ये
तिलिस्मी गुच्छा,
एक दिन जब मुरझाने पर आयेगा
अपने सुर्ख से रंग को छोड़ कर
ज़र्द सियाही मे बदल जाएगा
संभाले रखने की अपनी कोशिश मे
किसी किताब के सफहे मे दबकर
अर्क़ से दबा जाएगा ,कोई गुमशुदा हरुफ़
और फिर अपने माज़ी से मिलने के लिए
मेरे ख़यालों का दरवाज़ा खटखटाएगा
गुजिशता एक दिन
(वो भी पूरा नहीं)
और उसके कुछ ज़िंदा लम्हों को
अपने धुंधले अक्स मे छुपकर
धनक से कई मानी
मेरे झोली मे डाल जाएगा ......!!
तिलिस्मी गुच्छा,
एक दिन जब मुरझाने पर आयेगा
अपने सुर्ख से रंग को छोड़ कर
ज़र्द सियाही मे बदल जाएगा
संभाले रखने की अपनी कोशिश मे
किसी किताब के सफहे मे दबकर
अर्क़ से दबा जाएगा ,कोई गुमशुदा हरुफ़
और फिर अपने माज़ी से मिलने के लिए
मेरे ख़यालों का दरवाज़ा खटखटाएगा
गुजिशता एक दिन
(वो भी पूरा नहीं)
और उसके कुछ ज़िंदा लम्हों को
अपने धुंधले अक्स मे छुपकर
धनक से कई मानी
मेरे झोली मे डाल जाएगा ......!!
संध्या
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