नहीं चाहिए उनको कोई बाधा
अपने मुगालतों में...
अपने मुगालतों में...
बहुत सारा खाली वक्त है उनके पास
और ढेर सारा खाना
देखने को हैं सपने
और कर लिया है वक्त को खाली
दिवास्वप्नों के लिए ...
और ढेर सारा खाना
देखने को हैं सपने
और कर लिया है वक्त को खाली
दिवास्वप्नों के लिए ...
'इरशाद' 'वाह ' और' मुकर्रर ' की दिल खुश
आवाज़ों मे गुम है उनका असल व्यक्तित्व ...
और अहम के परचम थामे
स्वयंसिध्ध होने की होड़ में गुम हैं ...
आवाज़ों मे गुम है उनका असल व्यक्तित्व ...
और अहम के परचम थामे
स्वयंसिध्ध होने की होड़ में गुम हैं ...
अपने सफल अभिनय से
बिल्कुल नहीं कहते.... जो चाहते हैं
असल में
बिल्कुल नहीं कहते.... जो चाहते हैं
असल में
कहने और सोचने के फर्क को
दिखाई भी नही देने देते
अपने सशक्त अभिनय से वो ...
दिखाई भी नही देने देते
अपने सशक्त अभिनय से वो ...
अपने दोहरी शख़्सियत पर
अक्सर लगा देते है ज्ञान की छौंक
तथाकथित बुध्धिजीविता से ...
अक्सर लगा देते है ज्ञान की छौंक
तथाकथित बुध्धिजीविता से ...
बस लोभ का संवरण
बस के बाहर है इनके ....
बस के बाहर है इनके ....
(इन्हें पता ही नही .....ये कहाँ जाने के लिए निकले थे दरअसल ..
संध्या
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