वैसे भी पूरे होना
एक असंभव सी कोशिश ही तो है
फिर भी हम अक्सर पूरी ज़िंदगी इसी मे लगा देते हैं
और फिर आगे जाकर निहारते हैं
अपने अलग अलग हुये टुकड़ों का
अलग अलग जगह छूट से गए अनेक टुकड़े
हर टुकड़ा अपनी दास्ताँ बयाँ करता हुआ
एक असंभव सी कोशिश ही तो है
फिर भी हम अक्सर पूरी ज़िंदगी इसी मे लगा देते हैं
और फिर आगे जाकर निहारते हैं
अपने अलग अलग हुये टुकड़ों का
अलग अलग जगह छूट से गए अनेक टुकड़े
हर टुकड़ा अपनी दास्ताँ बयाँ करता हुआ
विस्थापित होकर जीना
और इससे बड़ी सज़ा क्या हो सकती है भला
और इससे बड़ी सज़ा क्या हो सकती है भला
संध्या
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