सनद
कुछ वादे नहीं
कुछ थोड़ी चमकती आँखों के संदेशे
लकीरों से लकीरों का स्पर्श
जानकर भी ,
कहीं मिलना नहीं इन्हें
बहुत ही आसानी से भुला दी गई
ध्वनियों का संगीत
अरे अब ये भी कोई कहानी है भला ....
बस खुद को दिया भरोसे की शक्ल का वहम
ताकि... सनद रहे ....
संध्या
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