ऐसा बिल्कुल सोचा जा सकता है कि,ज़िंदगी का गौरव अपनी समूची संपूर्णता में हम में से हर एक व्यक्ति की प्रतीक्षा कर रहा है , लेकिन वह कहीं बहुत गहरे में,अदृश्य आँखों से ओझल है ,वह ज़रूर वहाँ है और सहनूभूति शून्य नही है ,अनिच्छुक नही है , बघिर नही है । अगर तुम उसे सही शब्द , सही नाम से पुकारते हो तो वह आयेगा ,यह जादू का मर्म नही है कि, वह बनाता नही बुलाता है !
काफ्का
काफ्का
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