Ye soch ke aazaad kiya soch ko apni ,
jayegi kahan apani hai apani hee rahegi !
ये सोच के आज़ाद किया सोच को अपनी ,
जाएगी कहाँ , अपनी है ,अपनी ही रहेगी !
संध्या
jayegi kahan apani hai apani hee rahegi !
ये सोच के आज़ाद किया सोच को अपनी ,
जाएगी कहाँ , अपनी है ,अपनी ही रहेगी !
संध्या
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