अंजरी भर
हम अपनी
पवित्र आकांक्षाओं से
बांध लेते हैं कई सतरें
ये एक ओस की बूंद बन
हरी -हरी पातों की झालरों के
बीच दिल बन ठहर जाती हैं ....
आकांक्षाओं की ये बूँदें
एक पात से दूजी पात पर
गिरती हुई छोड़ जाती है अक्स अपने
सतर दर सतर ...
और कर लेना चाहते हैं हम संरक्षित
इन बूँदों को हमेशा -हमेशा के लिए
एक सिर्फ अपने लिए ...
इनके चिरंतन स्वभाव के बरक्स
देने और पाने की
रस्साकशी /रफ्तार के बीच
गड़बड़ा जाता है अक्सर
इनका ' पृष्ठ तनाव '
हरी भरी पाते जगमगा उठती हैं
सीख जाती हैं सांसे लेना
लहक लहक कर ...!
( अंजरी भर संभाल ही तो रखना चाहा है बस ......)
संध्या
हम अपनी
पवित्र आकांक्षाओं से
बांध लेते हैं कई सतरें
ये एक ओस की बूंद बन
हरी -हरी पातों की झालरों के
बीच दिल बन ठहर जाती हैं ....
आकांक्षाओं की ये बूँदें
एक पात से दूजी पात पर
गिरती हुई छोड़ जाती है अक्स अपने
सतर दर सतर ...
और कर लेना चाहते हैं हम संरक्षित
इन बूँदों को हमेशा -हमेशा के लिए
एक सिर्फ अपने लिए ...
इनके चिरंतन स्वभाव के बरक्स
देने और पाने की
रस्साकशी /रफ्तार के बीच
गड़बड़ा जाता है अक्सर
इनका ' पृष्ठ तनाव '
हरी भरी पाते जगमगा उठती हैं
सीख जाती हैं सांसे लेना
लहक लहक कर ...!
( अंजरी भर संभाल ही तो रखना चाहा है बस ......)
संध्या
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