ज़ख़ीरा भूला वो
एक लिबास था
उसके पास
रंग बहुतेरे थे
लाल, नीला, पीला ,हरा
हर उजास के लिए एक सधा रंग
हल्के गहरे
रंग मिलाकर ,नया रंग बनाने का
हुनर भी पता था उसे
एक पक्का रंग
कहीं भीतर अतल गहराईयों मे
छिपा रखा था उसने
जिनमे जब -तब डूबता उतराता रहता
ये रंग टंका था
जिस्म से उसके ...
शोख रंग जुदा होते हैं भला !
इस विस्मृति की बारिश का
क्या करे कोई ...
सब रंग धूल जाते हैं
आहिस्ता -आहिस्ता
कच्चे रंगों मे भीगे लिबास
ताक पर रखे थे
गाहे बगाहे चकाचौंध करते
चटख लिबास , आकर्षित करते उसे
कहाँ रख
भूल गया रे मन रंगरेज़
पक्के रंगों का ज़ख़ीरा ... ?
संध्या
एक लिबास था
उसके पास
रंग बहुतेरे थे
लाल, नीला, पीला ,हरा
हर उजास के लिए एक सधा रंग
हल्के गहरे
रंग मिलाकर ,नया रंग बनाने का
हुनर भी पता था उसे
एक पक्का रंग
कहीं भीतर अतल गहराईयों मे
छिपा रखा था उसने
जिनमे जब -तब डूबता उतराता रहता
ये रंग टंका था
जिस्म से उसके ...
शोख रंग जुदा होते हैं भला !
इस विस्मृति की बारिश का
क्या करे कोई ...
सब रंग धूल जाते हैं
आहिस्ता -आहिस्ता
कच्चे रंगों मे भीगे लिबास
ताक पर रखे थे
गाहे बगाहे चकाचौंध करते
चटख लिबास , आकर्षित करते उसे
कहाँ रख
भूल गया रे मन रंगरेज़
पक्के रंगों का ज़ख़ीरा ... ?
संध्या
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