वजूद
उसने
चुन ली है एक दीवार
अपने वजूद के आस-पास
कभी
आ जाती हैं
कुछ सदायें चलकर
खुद ब खुद उसके पास
कभी
वह गुज़रना चाहती है
उन सदाओं के करीब से
लेकिन ,
सदायें चली जाती है
आ जाती हैं
और वजूद
खड़ा रह जाता है वहीं
संध्या
उसने
चुन ली है एक दीवार
अपने वजूद के आस-पास
कभी
आ जाती हैं
कुछ सदायें चलकर
खुद ब खुद उसके पास
कभी
वह गुज़रना चाहती है
उन सदाओं के करीब से
लेकिन ,
सदायें चली जाती है
आ जाती हैं
और वजूद
खड़ा रह जाता है वहीं
संध्या
No comments:
Post a Comment