आवाज़
ये कुछ लोहे के ठंडे गोले सा
गले के नीचे अटक सा गया है
सुनो , निगला नही जा रहा
माना कि, ठंड बहुत है
और हाथों की पोरें
हो गई हैं बहुत ठंडी
कुछ
फुसफुसाहट से ज़रा तेज़
आवाज़ का कतरा
शायद कुछ
मदद कर सके
बहुत देर से निगाह
एक ही पन्ने पर जमीं है
पन्ना पलटा नही जा रहा है
क्या यह सचमुच किसी की आवाज़ है ...
या भरम है फकत ... ?
संध्या
No comments:
Post a Comment