असीम तुम
रंगों मे उकेरा
रंग कुछ कम पड़ गए
शब्द ढूँढते ही रह गए
अर्थ ढल न पाये
भावों में वो भाव ही न मिला
जो नाम था
पूरा तुम्हें रखते
ऐसी जगह ही ना थी .......
संध्या
रंगों मे उकेरा
रंग कुछ कम पड़ गए
शब्द ढूँढते ही रह गए
अर्थ ढल न पाये
भावों में वो भाव ही न मिला
जो नाम था
पूरा तुम्हें रखते
ऐसी जगह ही ना थी .......
संध्या
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