बच जाते हैं कुछ रंग
शुरुआत तो बतौर प्रयोग ही हुई थी
उसने मिलाये थे कुछ रंग ,परखनली में
कुछ अम्ल भी डाला साथ मे
यकबयक कुछ रंग छिटक गए
इससे पहले ,कि,उन्हे समझने की जुगत करते ...
एक दूसरा प्रयोग सामने खड़ा था
इस बार लिटमस पेपर भी था
पहचान संभव थी अलग -अलग
पर रंग इतने अलग और नए थे
बनाए गए रंग ,और चिन्हित रंग ...
उसने प्रयोग दर प्रयोग जारी रखे
और चलता रहा ...
रंगों की समझ और उन्हे एक कर
अलग कर जमा किया गया
कितनी तहें इस प्रयास में
अंतस तक गई,,छूट गईं ...
जब नही रह जाती आकांक्षाएं
तब भी बच रह जाते हैं कुछ रंग ...
अमरत्व लिए ....!
संध्या
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